रविवार, 3 अक्टूबर 2021

रोकनी ही होगी महंगाई की सुनामी


देश को ऊर्जा संकट से बचाना भी जरूरी है

सौर ऊर्जा चुल्हा क्रांति की योजना

विकेंद्रीकृत एवं गांव आधारित विकास ही स्थिर समाधान


कोरोना के बाद ताकतवर ऊर्जा की मांग ने पूरे देश और दुनिया में संकट बढ़ा दिया है। पूरा विश्व जिस आत्मघाती विकास की राह पर चल रहा है उसका दुष्परिणाम सामने आना शुरू हो गया है। अधिक से अधिक ऊर्जा और कार्यकर्ताओं की अचल बर्बादी और विकास का असंतोष पैदा हो गया है, जिसे यह समस्या बताई गई है। हम देश भर में बिजली और सुपरमार्केट की बचत कैसे कर सकते हैं। इसके लिए शोध एवं अनुसंधान कार्य को आधिकारिक तौर पर किया जाना चाहिए।  

वहीं चीन में बिजली संकट के चलते पूरी दुनिया में प्लास्टिक की आपूर्ति श्रृंखला में रूकावट आ गई है। चीन के कोयला आधारित बिजलीघरों से पहले ही पर्यावरण के लिए संकट पैदा हो गया है। वहीं भारत में भी पेड़ों के कारण ग्रेड की कमी हो गई है। इसके कारण कोयला आधारित बिजलीघरों में भारी परेशानी हो रही है। अगर अभी भी बिजली नहीं है तो हो सकता है कि प्लांट की कमी का कारण बिजलीघरों में बिजली उत्पादन बंद हो जाए या कम हो जाए। इससे पूरे देश में समस्या होगी।  

बढ़ता हुआ पेट्रोल-डीजल 

इस समय पूरी दुनिया में दरवाजे महंगे हो रहे हैं। अभी 78 ताल के आस-पास और अनुमान है कि यह 90 ताल या इससे अधिक 100 तक भी पहुंच सकता है। इससे तो दुनिया भर में फसल की सुनामी आएगी। भारत भी सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। भारत में मध्यम वर्ग और गरीब वर्ग की संख्या अधिक होने के कारण अर्थव्यवस्था को नुकसान होगा और बेरोजगारी भी बढ़ेगी। इसके साथ ही आम जनता में असंतोष भी बढ़ेगा। इस लड़ाई की सुनामी को रोकने के लिए सरकार को युद्ध स्तर पर काम करना चाहिए। 

जरूरी है सौर ऊर्जा चूल्हा क्रांति 

कच्चे माल की कीमत में भी वृद्धि होगी। कॉमर्शियल गैस बिजनेस की कीमत सबसे पहले बढ़ी है। सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि सौर ऊर्जा आधारित चूल्हा क्रांति की योजना युद्ध स्तर पर लागू होनी चाहिए। सबसे पहले सौर ऊर्जा आधारित चूल्हों की स्थापना करना चाहिए। इसके साथ ही मध्यम वर्ग और गरीबों के लिए सौर ऊर्जा चूल्हों पर अनुदान का वितरण और बिक्री होनी चाहिए। अधिक से अधिक सौर ऊर्जा चूल्हों के विकास के लिए शोध कार्य को बढ़ावा देना चाहिए। वहीं ग्रामीण इलाकों में बायोगैस आधारित चूल्हों और पारंपरिक चूल्हों के डिजाइन और उनकी क्षमता को कैसे बढ़ाया जाए, इस पर भी शोध एवं विकास कार्य तेजी से होना चाहिए। 

कर मुक्त हो सार्वजनिक परिवहन

महंगाई की सुनामी रोकने के लिए सार्वजनिक परिवहन को पूर्ण रूप से कर मुक्त और टोल मुक्त कर देना चाहिए। इससे सडक़ों पर निजी वाहन कम होंगे और प्रदूषण भी कम होगा। पेट्रोल-डीजल की मांग भी नियंत्रण में आ जाएगी। डीजल की कीमत बढऩे के कारण सभी उत्पादों और खाद्य पदार्थों की कीमत बढ़ जाती है जिससे जनता की परेशानी बढ़ती ही जाती है। इसके लिए छोटे भार वाहनों को टोल मुक्त करने पर विचार करना चाहिए। बड़े भार वाहनों जैसे ट्रक आदि पर भी टोल कम करना चाहिए। 

विकसित किए जाए इलेक्ट्रिक ट्रक-बस

महंगाई रोकने और प्रदूषण कम करने के लिए देशभर में इलेक्ट्रिक ट्रक और बस विकसित किए जाने जरूरी हो गए है। अमरीका में अमेजन की सहायक कंपनी ने इलेक्ट्रिक पिकअप विकसित किया है। भारत में भी इसी तरह की बड़ी पहल की जरूरी है। हमे भी इलेक्ट्रिक पिकअप, ट्रक और बस विकसित करने की जरूरत है ताकि महंगाई को रोका जा सके। वहीं इलेक्ट्रिक ट्रक-बस और अन्य वाहनों की बैटरियों और अन्य को पर्यावरण अनुकूल बनाकर उनके निस्तारण का भी स्थायी एवं ठोस प्रबंध करना होगा। कहीं ऐसा न हो कि एक कुए से निकले और दूसरे कुए में गिर जाए वर्तमान में विकास के नाम पर समस्त संसार में यही हो रहा है। 

इसके साथ ही देश के रेलवे टै्रक का विस्तार और विद्युतीकृत टै्रक का लाभ आम जनता को मिले इसके लिए अधिक से अधिक विद्युत रेल इंजनों का निर्माण करना चाहिए। उपेक्षित पड़े ग्रामीण और कस्बाई रेलवे स्टेशनों का विकास करना चाहिए। इनको मेमू या रेल बस आदि से जोडऩा चाहिए। इससे भी ग्रामीणों की निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी। 

नए विकास मॉडल पर काम करें सरकार और समाज 

इस ऊर्जा संकट का स्थानीय समाधान तो नया विकास मॉडल ही हो सकता है। महानगर और नगर आधारित विकास मॉडल तो बहुत अधिक ऊर्जा की आपूर्ति करने वाला है। इससे तो समस्या बहुधा ही होगी। अत: स्थायी समाधान तो गांव आधारित विकास ही है। इसके लिए विकेंद्रीकृत विकास को प्रोत्साहन दिया जाए। लोकल फोर वोकल के लिए बड़ी सामग्री उसे युद्ध स्तर पर क्रियान्वित किया जाए। इसके साथ ही ग्रामीण स्तर के यांत्रिक तंत्र का आधुनिकीकरण किया जाये। साथ ही आख़री राज चुनाव व्यवस्था में भी सुधार की आवश्यकता है ताकि कश्मीर से पलायन किया जा सके। इसके लिए सयंमित लाइफ स्टाइल को भी प्रोत्साहन दिया जाना जरूरी है क्योंकि उपभोक्तावादी विकास के कारण ही यह पर्यावरण संकट और जीवन लोकतंत्र का संकट पैदा हुआ है। स्थिर समाधान तो कम मालदीव वाली सरल और संयमित जीवन शैली ही है। इसी तरह के विकास को अपना कर भारत दुनिया को नई राह।

हरित विकास ही समाधान है

अब देश और दुनिया का हरित विकास ही बचा सकता है हमे हरित विकास के लिए काम करना होगा। अभी भी विकास के नाम पर हरियाली को ख़त्म किया जा रहा है। इसे बदलना ही होगा। भारत मे हरियाली को ईश्वर का वरदान मन गया है। राजस्थान मे ओरण इसका उदहारण है। लेकिन वर्तमान मे पश्चिम और चीन की अंधी नक़ल के कारन विकास के नाम पर हरियाली को ख़त्म किया जा रहा है जो दुखद है। हम सभी को हरित विकास के लिए काम करना चाहिए । येही भारत की परम्परा है। इसी से भारत विश्व मे नेता बन सकेगा। विकास के नाम पर विनाश की प्रक्रिया हो रही है । भारत को दुनिया के सामने उदाहरण प्रस्तुत करना ही होगा।